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Monday, May 11, 2026

​प्रशासनिक मौन या रसूख का खेल? केलवारा खुर्द में सामुदायिक भवन की भूमि पर 'धनबल' का बुलडोजर!

तेज खबर न्यूज़ कटनी :- कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द के खसरा क्रमांक 461 (यादव मोहल्ला) की स्थिति देखकर लगता है कि यहाँ कानून के हाथ 'पैसे और रसूख' की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार, जिस भूमि को शासन ने पूरे समाज के हित के लिए सामुदायिक भवन हेतु आरक्षित किया था, आज उस पर एक रसूखदार व्यक्ति, रममूलाल धनगड नामक व्यक्ति द्वारा अवैध निर्माण का 'महल' खड़ा किया जा रहा है।

          पंच की गुहार, पर प्रशासन की नींद नहीं टूटी

     हैरानी की बात यह है कि यह मामला बंद कमरों का नहीं है। वार्ड की पंच सरोज राजपाल ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इसकी लिखित शिकायत तहसीलदार, एसडीएम (SDM) और यहाँ तक कि कलेक्टर कार्यालय में भी की है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी मामले को दर्ज कराया गया। लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात। आज दिनांक तक मौके पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, जिससे स्पष्ट है कि रामूलाल धनगर का 'अशोक' और 'करोड़पति' होने का ठप्पा सरकारी तंत्र पर भारी पड़ रहा है।

​             आम जनता के हक पर डकैती

​    सामुदायिक भवन किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे गांव की साझा विरासत होती है। जहाँ गरीबों के विवाह, सामाजिक कार्यक्रम और पंचायत की बैठकें होनी चाहिए थीं, वहाँ आज निजी कब्जा किया जा रहा है। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या प्रशासन केवल गरीबों के छोटे-मोटे अतिक्रमण हटाने के लिए बना है? क्या करोड़ों की संपत्ति और ऊंचे रसूख के आगे नियम-कायदे घुटने टेक देते हैं?

​    शिकायत के बाद भी कार्यवाही न होना इस बात का प्रमाण है कि या तो विभाग के जिम्मेदार अधिकारी रसूखदार के दबाव में हैं, या फिर इस अवैध निर्माण को मूक सहमति दी जा चुकी है।

​             मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं:

​जब पंच खुद शिकायत कर रही हैं, तो जाँच की फाइलें फाइलों में ही क्यों दबी हैं?

​क्या 181 हेल्पलाइन और कलेक्टर जनसुनवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई हैं?

​क्या रामूलाल धनगर का रसूख संविधान और राजस्व संहिता से भी ऊपर है?

​                               निष्कर्ष

     यदि जल्द ही प्रशासन ने इस अवैध निर्माण पर रोक लगाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया, तो यह न केवल कैलवारा खुर्द की जनता के साथ अन्याय होगा, बल्कि शासन की साख पर भी एक काला धब्बा होगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन 'धनबल' के आगे झुकता है या 'जनहित' में कोई कड़ा फैसला लेता है।

अशोक कुमार मिश्रा 
संयोजक 


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