जानकारी के मुताबिक, गर्ल्स कॉलेज गुलवारा के सामने स्थित पूरी भूमि शासकीय बताई जा रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसी शासकीय जमीन पर दो पक्की दुकानों का निर्माण कर लिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ये दुकानें किसी "शर्मा" नामक व्यक्ति की बताई जा रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब संबंधित खसरा नंबर 1365 शासकीय रकबा है, तो फिर 1365/1/1 खसरा संख्या के नाम पर निजी निर्माण कैसे हो गया? क्या यह रिकॉर्ड में हेरफेर है या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से शासकीय जमीन पर कब्जा किया गया है?
अगर यह जमीन सरकारी है, तो इस पर दुकान कैसे बन गई? इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले में राजस्व विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बिना किसी वैध अनुमति के यदि निर्माण हुआ है, तो यह एक बड़ा घोटाला हो सकता है। सवाल यह भी है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर आंखें मूंद रखी थीं या फिर सब कुछ उनकी जानकारी में हो रहा था?
फिलहाल, यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और सच्चाई कब तक सामने आती है।





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