शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश दुबे का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत आवेदन कर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए हैं।उनका दावा है कि प्राप्त दस्तावेजों से यह संदेह उत्पन्न होता है कि संबंधित अधिकारी की नियुक्ति और सेवा लाभ कथित रूप से फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के आधार पर प्राप्त किए गए।
राकेश दुबे के अनुसार, उन्होंने इस मामले की शिकायत मंत्री स्तर तक की है, लेकिन आज दिनांक तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।साथ ही सेवा नियमों के उल्लंघन एवं विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान बनता है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
अब बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोप और दस्तावेज सामने आने के बावजूद जांच में देरी क्यों हो रही है? क्या प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा या मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा?
पक्ष रखने का अवसर
इस मामले में प्रेम नारायण तिवारी या संबंधित विभाग का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, परंतु समाचार लिखे जाने तक प्रेम नारायण तिवारी से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
प्रतिक्रिया मिलने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।फिलहाल यह पूरा मामला जांच का विषय है, लेकिन यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह न केवल सिस्टम पर सवाल खड़े करता है बल्कि ईमानदार कर्मचारियों के अधिकारों पर भी चोट है।





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