तेज खबर न्यूज़ कटनी:- कटनी में दिनदहाड़े कथित अवैध उत्खनन, शासन को लाखों के राजस्व नुकसान का आरोप!
शिकायत पर कार्यवाही नहीं, शिकायतकर्ता ने उठाए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल!
जेसीबी से खोदे गए गहरे गड्ढे,ओवरलोड डंपर और प्रशासन की चुप्पी पर बवाल!
कटनी में अवैध खनन पर बड़ा खुलासा! जनसुनवाई और CM हेल्पलाइन भी बेअसर।
मध्यप्रदेश के कटनी जिले से कथित अवैध खनन का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ईश्वरी चक्रवर्ती का आरोप है कि उन्होंने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई, खनिज विभाग, वन विभाग, थाना कुठला और यहां तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई,लेकिन कथित अवैध खनन का सिलसिला नहीं रुका।
शिकायतकर्ता ईश्वरी चक्रवर्ती के अनुसार ग्राम कुम्हरवारा, तहसील रीठी स्थित खसरा नंबर 373 एवं 374 की भूमि पर बिना वैध खनन अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के लंबे समय से जेसीबी और पोकलेन मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि प्रतिदिन सैकड़ों डंपर और ट्रैक्टरों के माध्यम से परिवहन एवं भंडारण किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कथित अवैध खनन से मध्यप्रदेश शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। वहीं भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने 26 मई 2026 को जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर आवेदन दिया था। उनके अनुसार कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश भी दिए, लेकिन उसके बाद भी मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि स्थानीय स्तर पर कुछ जिम्मेदार अधिकारियों, ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों तथा वन विभाग के कुछ सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत के कारण कथित अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि खनिज, राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर जांच कराई जाए, कथित अवैध उत्खनन में उपयोग किए गए जेसीबी, पोकलेन, डंपर और ट्रैक्टरों को जब्त किया जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम तथा खनिज संबंधी प्रावधानों के तहत कठोर कार्यवाही की जाए।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं बल्कि सरकारी राजस्व, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।





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